रायपुर
भारत सरकार देश के सभी राज्यों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत उनके यहां प्रचलित राशन कार्ड की संख्या के आधार पर चांवल का कोटा जारी करती है। प्रधानमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना का चांवल का कोटा भी प्रदेश के खाद्य विभाग द्वारा दिए गए राशन कार्ड की संख्या के आधार पर मुफ्त में बांटने के लिए दिया जा रहा है।
केंद्र शासन हर साल भेजे गए चांवल के वितरण और बचत की भी जानकारी मांगता है। इसी के आधार पर आडिट भी होता है। बताना जरूरी होगा कि वर्ष 2020 से 2022 की अवधि में छत्तीसगढ़ राज्य की तेरह हजार राशन दुकानों में नियम विपरीत सौ फीसदी चांवल कोटा जारी किया गया। राशन दुकानों में बचत होने के बाद भी खाद्य संचालनालय ने केन्द्र से चांवल मंगवा लिया, निर्धारित कोटा भेजे जाने पर 600 करोड़ का चांवल घोटाला हो गया। सामाजिक संस्था हमर संगवारी के अध्यक्ष राकेश चौबे ने सूचना के अधिकार में खाद्य संचालनालय से जनवरी 2020,से दिसंबर 2023तक केंद्र शासन द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत केंद्र शासन से मिले, वितरण और बचे हुए चांवल के मात्रा की जानकारी मांगी थी।
खाद्य संचालनालय के जन सूचना अधिकारी ने इस प्रकार की कोई जानकारी संधारित नहीं होने की जानकारी देकर अपीलीय अधिकारी के पास जाने की सूचना भेज दी है। दरअसल ये जानकारी इसलिए नहीं जा रही है क्योंकि इससे 600करोड़ के राशन घोटाले की जानकारी उजागर हो जायेगी। केंद्रीय खाद्य मंत्री और सचिव को यह सारी जानकारी भेजकर जांच की मांग की गई है।
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